Success Stories
सफलता की कहानी
सफलता कहानी का शीर्षक: जलवायु अनुकूल खेती से लागत में कमी एवं आय में वृद्धि: किसान संजीव कुमार की सफलता कहानी
विषयगत क्षेत्र (Thematic Area): जलवायु अनुकूल कृषि, शून्य जुताई, डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR), अंतरवर्ती खेती, संसाधन संरक्षण आधारित कृषि
केवीके/संस्थान का नाम: आरपीसीएयू – कृषि विज्ञान केंद्र, शिवहर
किसान/उद्यमी का नाम एवं पूर्ण पता:
|
क्र.सं. |
विवरण |
जानकारी |
|
1 |
नाम |
श्री संजीव कुमार |
|
2 |
गाँव |
हरनाही |
|
3 |
प्रखंड |
शिवहर |
|
4 |
जिला |
शिवहर |
|
5 |
आयु |
45 |
|
6 |
शिक्षा |
मैट्रिक |
|
7 |
मोबाइल नंबर |
8581941423 |
परिचय
श्री संजीव कुमार, ग्राम हरनाही, जिला शिवहर के एक प्रगतिशील किसान हैं, जो लगभग सात एकड़ कृषि भूमि पर लंबे समय से परंपरागत खेती करते आ रहे थे। परंपरागत कृषि पद्धतियों में बार-बार जुताई, अधिक श्रमशक्ति पर निर्भरता, असंतुलित उर्वरक उपयोग तथा सिंचाई जल की अत्यधिक खपत जैसी समस्याएँ प्रमुख थीं। इन कारणों से उनकी उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही थी, जबकि शुद्ध लाभ अपेक्षाकृत सीमित रह जाता था। डीजल की बढ़ती कीमतों, मजदूरों की कमी और मौसम की अनिश्चितता ने खेती को और अधिक जोखिमपूर्ण बना दिया था। परिणामस्वरूप खेती की स्थिरता और लाभप्रदता दोनों प्रभावित हो रही थीं। वर्ष 2020 में उनके गाँव का चयन कृषि विज्ञान केंद्र, शिवहर द्वारा जलवायु अनुकूल खेती कार्यक्रम के अंतर्गत किया गया, जिसने उनके कृषि जीवन में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन की शुरुआत की। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के नियमित मार्गदर्शन, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, फील्ड विजिट तथा तकनीकी परामर्श के माध्यम से उन्होंने संसाधन संरक्षण आधारित आधुनिक तकनीकों को अपनाना प्रारंभ किया। उन्होंने गेहूं की फसल में शून्य जुताई तकनीक को अपनाया, जिससे जुताई की लागत में कमी आई, मिट्टी की नमी संरक्षित रही और डीजल की बचत हुई। धान की खेती में उन्होंने धान की सीधी बुआई (DSR) पद्धति अपनाई, जिससे रोपाई पर होने वाला श्रम व्यय घटा तथा जल की बचत संभव हुई। इसके अतिरिक्त, अंतरवर्ती खेती प्रणाली अपनाकर उन्होंने भूमि का अधिकतम उपयोग किया और विभिन्न फसलों के माध्यम से अतिरिक्त आय प्राप्त की। इन समेकित प्रयासों से उनकी उत्पादन लागत में कमी आई, उपज में वृद्धि हुई तथा प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित हुआ, जिससे उनकी खेती अधिक टिकाऊ, लाभकारी और जलवायु के अनुकूल बन सकी।
उपलब्ध संसाधन/इन्वेंट्री की सूची
|
क्र.सं. |
संसाधन का नाम |
विवरण/संख्या |
|
1 |
कृषि भूमि |
7 एकड़ |
|
3 |
कृषि यंत्र |
स्प्रेयर |
|
4 |
सिंचाई सुविधा |
पम्पसेट |
|
5 |
पशुधन |
गाय (1) |
अपनाई गई तकनीक/नवाचार का विवरण
शून्य जुताई (Zero Tillage) से गेहूं उत्पादन: शून्य जुताई के अंतर्गत खेत की पारंपरिक जुताई नहीं की गई। इससे मिट्टी की नमी संरक्षित रही, डीजल की बचत हुई तथा जुताई लागत में कमी आई। उत्पादन में वृद्धि के साथ पर्यावरणीय लाभ भी प्राप्त हुए।
धान की सीधी बुवाई (DSR): धान की रोपाई के स्थान पर मशीन द्वारा सीधी बुवाई की गई। इससे श्रम लागत कम हुई, पानी की बचत हुई तथा फसल की बढ़वार संतुलित रही।
अंतरवर्ती खेती
- आलू + मक्का
- मक्का + गोभी
- मक्का + जई
- मक्का + मटर
क्षमता निर्माण / संस्थागत सहयोग (100 शब्द)
कृषि विज्ञान केंद्र, शिवहर द्वारा आयोजित जलवायु अनुकूल खेती संबंधी प्रशिक्षण कार्यक्रमों, फील्ड दिवस, कृषक गोष्ठियों तथा तकनीकी परामर्श सत्रों में श्री संजीव कुमार की निरंतर एवं सक्रिय भागीदारी रही है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें शून्य जुताई तकनीक, धान की सीधी बुवाई (DSR), संतुलित उर्वरक प्रबंधन, मृदा परीक्षण आधारित पोषण प्रबंधन तथा समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन (IPM) की वैज्ञानिक जानकारी प्रदान की गई। कृषि वैज्ञानिक समय-समय पर उनके खेत का निरीक्षण कर फसलों की स्थिति का मूल्यांकन करते हैं तथा आवश्यकतानुसार सुधारात्मक सुझाव देते हैं। मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया गया, जिससे लागत में कमी आई और मिट्टी की उर्वरता में सुधार हुआ। कीट या रोग के प्रारंभिक लक्षण दिखने पर त्वरित निदान एवं उचित उपचार की सलाह मिलने से संभावित नुकसान को काफी हद तक रोका जा सका। इस प्रकार तकनीकी सहयोग, नियमित मार्गदर्शन और वैज्ञानिक हस्तक्षेप के कारण उनकी फसल उत्पादन प्रणाली अधिक स्थिर, लागत नियंत्रित तथा दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बन पाई है।
स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तकनीक में किए गए परिवर्तन
|
क्र.सं. |
तकनीक |
स्थानीय समस्या |
किया गया परिवर्तन |
प्राप्त लाभ |
|
1 |
शून्य जुताई |
अधिक जुताई लागत |
बिना जुताई बुवाई |
लागत व डीजल बचत |
|
2 |
DSR |
अधिक श्रमिक आवश्यकता |
मशीन द्वारा सीधी बुवाई |
श्रम व जल बचत |
|
3 |
अंतरवर्ती खेती |
सीमित आय |
बहु-फसल प्रणाली |
अतिरिक्त आय |
|
4 |
मृदा परीक्षण |
असंतुलित उर्वरक उपयोग |
परीक्षण आधारित उर्वरक |
मृदा स्वास्थ्य सुधार |
आर्थिक विश्लेषण
हस्तक्षेप से पहले (परंपरागत प्रणाली)
|
क्र. |
फसल प्रणाली |
कुल लागत (₹/ एकड़) |
सकल आय (₹/ एकड़) |
शुद्ध आय (₹/ एकड़) |
B:C अनुपात |
|
1 |
धान–गेहूँ–मूंग |
65,000 |
95,000 |
30,000 |
1.46 |
|
2 |
धान–मक्का |
50,000 |
75,000 |
25,000 |
1.50 |
|
3 |
धान–मक्का
|







